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Wednesday, August 14, 2013

अज़ीज़ जौनपुरी : मेरा मुल्क मेरा मज़हब हो

               मेरा मुल्क़ मेरा मज़हब हो 
         


          मेरा  मुल्क  मेरा  मज़हब   हो ,  मेरा  मज़हब   मेरा  ईमान रहे
          फ़लक से चाँदनी उतरे लिए एक हाथ में गीता,एक में कूरान रहे 
          फ़िक्र  ज़हन में रखना  मुल्क  के रुतबे  का  मेरे  बच्चों  हरदम 
          यही आरज़ू रहे,यही तलब रहे  मुल्क का रुतबा रहे औ शान रहे 
          ये मुल्क हँस -हँस के कहे,क्या औज़  क्या रहबरे कामिल पाया 
          यही आरज़ू,यही तमन्नाये-वफ़ा,यही मसला यही  अरमान रहे 
          गाँधी के लहू ,को भगत की शान को, न  कभी आँच लगने पाए 
          हिमाला की लाज़ रखना , यही फ़िक्र, यही दीन ,यही ईमान रहे           
          रश्क  ज़न्नत  का सलामत रहे  कश्मीर के ज़लवा -ए -सहर से
          गुँचे हुब्बे-वतन के खिलते रहें ताबाँ वतन की आन रहे शान रहे 
          हर  कतरा  लहू का मुल्के  -  शम्मे - अदब  रोशन की राहे चले 
         कायम ये  ख्वाहिश रहे गर्दो गुबार  ख़ाके  वतन मेरा कफ़न रहे

                                                                      अज़ीज़ जौनपुरी 







           
        

12 comments:

  1. हर कतरा लहू का मुल्के - शम्मे -अदब रोशन की राहे चले
    कायम ये ख्वाहिश रहे गर्दो गुबार ख़ाके वतन मेरा कफ़न रहे,,,

    वाह बहुत सुंदर गजल ,,,

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    RECENT POST: आज़ादी की वर्षगांठ.

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  2. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए
    nice post

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  3. हर कतरा लहू का मुल्के - शम्मे - अदब रोशन की राहे चले
    कायम ये ख्वाहिश रहे गर्दो गुबार ख़ाके वतन मेरा कफ़न रहे

    मुल्क पे मिटने का गजब हौसला और ख्वाहिश

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  4. सटीक रचना
    स्वतंत्र दिवस की शुभकामनाएं
    latest os मैं हूँ भारतवासी।
    latest post नेता उवाच !!!

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  5. सुन्दर रचना ....स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  6. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 17/08/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

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  7. Rastriy prem ki sundar abhivykti

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  8. मेरा मुल्क मेरा मज़हब हो , मेरा मज़हब मेरा ईमान रहे
    फ़लक से चाँदनी उतरे लिए एक हाथ में गीता,एक में कूरान रहे

    ...लाज़वाब...बहुत सुन्दर अहसास...

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  9. मेरा मुल्क़ मेरा मज़हब हो
    पर ऐसा आज-कल कोई मानता कहाँ है ...हर किसी को अपनी ही पड़ी हुई है

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  10. बड़ी प्यारी ग़ज़ल है ..
    बधाई आपको !

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