Pages

Google+ Badge

Friday, March 15, 2013

अज़ीज़ जौनपुरी : मेरे चेहरे को अपना कहा कीजिए

   

          मेरी गजलों को सुब्हो-शाम पढ़ा कीजिए 
         आईना  देख  शर्मा   फिर   हँसा  कीजिए 

         जिंदगी   बिन  तुम्हारे   मेरी   कैसे कटी 
         मेरी   नज़रों  में   ख़ुद  यह  पढ़ा कीजिए 
   
         भूख  से   हो   गई  है  अब  मेरी  दोस्ती 
         पेट   बातों  से  मेरा  अब  भरा  कीजिए

         अपनी  नाकामियों  पर न  शर्माओं तुम 
         हँस   इल्ज़ाम   मुझ   पर  मढ़ा कीजिए

          एक  चेहरा  कोई  जुड़  गया  जिंदगी से
          मेरे   चेहरे   को   अपना  कहा  कीजिए 

         चंद   लमहे   ज़िन्दगी   के  गुनहगार थे
         उन  गुनाहों  को  मेरे  सर  मढ़ा कीजिए

         दिया  प्यार का  जल  रहा है जो दिल में
         अपनी  पलकों  पे  उसको रखा कीजिये

          एक चिंगारी  अभी  है  महफूज दिल में   
          अपनी  पलकों से उसको   हवा  दीजिए
         
         कुछ  शरम कीजिए कुछ रहम कीजिए
       "अज़ीज़"से प्यार जी भर किया कीजिए 

                                           अज़ीज़ जौनपुरी