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Wednesday, January 7, 2015

अज़ीज़ जौनपुरी : पिया गंध मोरे सांसन में है


                  



सुख  दुख  का  है ताना  बाना
जीवन   तो   है   आना  जाना

जोलहा जी  इक साड़ी बनाना
रंग  पिया  ओहमा  भर  जाना

जीवन है सांसों    की    गठरी  
कभी   ओढ़ना  कभी बिछाना

पिया  गंध  मोरे  सांसन में है
वही  सूँघना   वही   सुंघाना   

काशी    देखी    मथुरा   देखा 
कण कण  मोरे पिया समाना

काबे   गया   कैलाश  भी देखा 
देखली  पिया  का  ताना बाना

मकड़   जाल  जीवन  है सारा 
मेरो  पिया  मोहें तुम्हीं बचाना

अँखियन में मोरे तुम्हरी सूरत
पलक  सेज  पर  मोहे  सुलाना

अँखियन से असुवन ढरकत है
असुवन को  तुमही समझाना

जिवन में  एक आस  तुम्हारी
डोर प्रीति  की  नहिं  उलझाना

चली चला का समय है आया
तुम्हरे संग मोहे है उड़  जाना

                      अज़ीज़ जौनपुरी
              
ओहमा --उसमें