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Sunday, July 28, 2013

अज़ीज़ जौनपुरी : बदल जाता है

            बदल जाता है


                                  (अ )
क्या ज़मीं क्या अस्मां न किसी पर भरोसा कीजे
चंद  लमहात  में   सारा  ज़माना   बदल  जाता है
वो तो फ़कत फ़ितरत है उसकी फ़ितरत है बदलना
आज - कल  इन्सान  क्या ख़ुदा भी बदल जाता है

                                (ब )

उनकी   खुशबू   से   वाकिफ़   है  चमन   का   भौरां  -भौरां
है  यही  वज़ह  कि  चमन  बीराँ -  बीराँ  सा  नज़र  आता है
उनके   रूखसार  पे  इसकदर  भौरों  का  ईतरा  के मडराना  
ये हकीकत है मैंने देखी है महका-महका चाँद नज़र आता है                        

                                  (स )
 मेरी गज़लों में सिन्ध की दरिया है चेनाब का पानी है
 किसी  मरहूम  की  कहानी  है  मेरे आँख का पानी है 
 एक   फ़ूल   है  गुलशन   का   एक  नाज़   है परी  की
 एक   रूह  तड़पती   है   और   झेलम  की   कहानी है
 न किसी और का चेहरा है न किसी और की कहानी है
 कश्मीर की बादी है उसकी खुशबू है उसकी निसानी है
                                  (म )
                                 
 हालत  के  बंजर पर   ख्वाहिसों  की एक  मचलती  कली 
 वक्त की आन्धिओं का क़हर और शाख़ से गिरता गुलाब
 चंद  रोज़  भी  न  ठहर  सकी  लाली  उसके सुर्ख़ होटों पर
 हाय  रे  किश्मत कि न  खिल सका न महक सका ग़ुलाब

                                                    अज़ीज़ जौनपुरी