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Tuesday, May 7, 2013

अज़ीज़ जौनपुरी : बिना सियाही के जईसे कलम जिंदगी

      बिन सियाही के जईसे कलम ज़िन्दगी 
      (रफ़ीक शादानी, जिन्होंने उर्दू शायरी के साथ अवधी में गज़ल
      लिखने की परम्परा की  नींव रखी, को सादर समर्पित रचना )
     
    


       बिना तोहरे  हमरा  कईसे कटल  जिंदगी 
       मत  पूछ  तू,  रोई - रोई   मरल ज़िन्दगी 

      रोज  तोहका   निहारत  कटल   ज़िन्दगी 
       तनी  अईतू त होई जात  गज़ल ज़िन्दगी 

       कभी पुरुवा त कभी पछुवा भयल जिंदगी 
      बदलत करवट सारी कट गयल  ज़िन्दगी
  
      जईसे  पूनम में  अमावस  भयल जिंदगी 
      बिना पानी के मछली होई गयल ज़िन्दगी   
    
      कोरे  कागज़  के   बाचत  कटल जिन्दगी 
      बिन स्याही के कलम से लिखल ज़िन्दगी 

      मत पूँछ  अज़ीज़ क कईसे कटल जिंदगी 
      जईसे सूखल नदिया में डूब गईल जिंदगी 

                                    अज़ीज़ जौनपुरी 
     
       
     

      

16 comments:


  1. आंचलिक भाषा में ग़ज़ल लिखने का सुन्दर प्रयाश !
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post'वनफूल'

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  2. आंचलिक भाषा में रफीक शादानी शहब को समर्पित ,बेहतरीन ग़ज़ल
    बिना तोहरे हमरा कईसे कटल जिंदगी
    मत पूछ तू, रोई - रोई मरल ज़िन्दगी

    रोज तोहका निहारत कटल ज़िन्दगी
    तनी अईतू त होई जात गज़ल ज़िन्दगी

    कभी पुरुवा त कभी पछुवा भयल जिंदगी
    बदलत करवट सारी कट गयल ज़िन्दगी

    जईसे पूनम में अमावस भयल जिंदगी
    बिना पानी के मछली होई गयल ज़िन्दगी

    कोरे कागज़ के बाचत कटल जिन्दगी
    बिन स्याही के कलम से लिखल ज़िन्दगी

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  3. कोरे कागज़ के बाचत कटल जिन्दगी
    बिन स्याही के कलम से लिखल ज़िन्दगी -------
    वाह बहुत खूब
    सुंदर
    बधाई

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  4. वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति,आंचलिक भाषा में लाजबाब गजल,,

    RECENT POST: नूतनता और उर्वरा,

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  5. अद्भुत और दिल को छूनेवाली ग़ज़ल के लिए कोटिशः बधाई एक शानदार नई शुरुवात .....

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  6. बहुत ही अच्छा प्रयास. बहुत सुन्दर लिखा है.

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  7. बहुत ही शानदार ग़ज़ल की प्रस्तुति,भोजपुरी में भी अच्छा पकड़ बा आपके.

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  8. सुंदर ...प्रभावित करते भाव

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  9. कभी पुरुवा त कभी पछुवा भयल जिंदगी
    बदलत करवट सारी कट गयल ज़िन्दगी ..

    वाह ... मज़ा ही आ गया ... भरपूर लाजवाब गज़ल ... अवधि में इसका मज़ा दुगना हो गया ...

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  10. सुन्दर प्रस्तुति .बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बधाई आपको

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  11. कोरे कागज़ के बाचत कटल जिन्दगी
    बिन स्याही के कलम से लिखल ज़िन्दगी.
    बहुत सुन्दर..

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  12. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति. बोली की मिठास और रचना का दर्द मिलकर एक बढियां मिश्रण बना है.

    -Abhijit (Reflections)

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  13. वाह बहुत खूब!बहुत ही सुन्दर!

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  14. वाह बहुत अच्छा प्रयास

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