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Friday, September 18, 2015

अज़ीज़ जौनपुरी : तोड़ दी माला किसी नें






नाम चरणामृत का लेकर
विष  पिला डाला किसी नें 
जब सुमिरनी  हाथ में ली
तोड़  दी  माला  किसी नें 

सत्य की इक मूरत गढ़ी थी 
चूर  कर   डाला   किसी  नें
न्याय  की  जब  दी  दुहाई
बेडीं पाँव में डाला किसी नें 

ले  हाथ  समिधा ज्यों बढ़ा
बुझा दी अग्नि-ज्वाला किसी नें 
आरती      की    थाल   से 
घर   जला  डाला  किसी नें 

बन  के   मीरा  जब  पुकारी
दे   दिया   प्याला  किसी नें 
वीणा  जब  अहिंसा  की उठी
धड़ अलग कर डाला किसी नें 


                अज़ीज़ जौनपुरी


 




5 comments:

  1. अति सुंदर लेख

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  2. इतना बढ़िया लेख पोस्ट करने के लिए धन्यवाद! अच्छा काम करते रहें!। इस अद्भुत लेख के लिए धन्यवाद ~Ration Card Suchi

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  3. आपने बहुत सुंदर रूप से कविता को वर्णन किया है। इस कविता के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
    webinhindi

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  4. What a great post!lingashtakam I found your blog on google and loved reading it greatly. It is a great post indeed. Much obliged to you and good fortunes. keep sharing.shani chalisa

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  5. उम्दा लिखावट ऐसी लाइने बहुत कम पढने के लिए मिलती है धन्यवाद् (सिर्फ आधार और पैनकार्ड से लिजिये तुरंत घर बैठे लोन)

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